
बद्दी (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के नालागढ़ और बद्दी में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अलग-अलग कानून होने से बद्दी के लोगों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। बद्दी में जिस प्लाट की ग्राउंड कवरेज 60 फीसदी मिलती है वहीं नालगढ़ में उसी प्लाट की 75 फीसदी कवरेज मिलती है। ऐसे में एक ही क्षेत्र में भिन्न कानून होने से बद्दी के लोगों में रोष व्याप्त है।
बीबीएन के बद्दी और नालागढ़ में अलग-अलग मास्टर प्लान बने। जिसके चलते यहां पर टीसीपी के अलग-अलग कानून हैं। नालागढ़ में 150 वर्ग मीटर का प्लाट खरीदने वाले को तीन मीटर फ्रंट तथा साइडों में डेढ़-डेढ़ मीटर जमीन छोड़नी पड़ती है। जबकि बद्दी में उतने ही प्लाट के लिए साइडों से 2-2 मीटर जमीन छोड़नी पड़ती है। बद्दी में नालागढ़ की बजाए अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। लोगों का कहना है कि यहां पर ज्यादा आबादी होने से टीसीपी को यहां अधिक छूट देनी चाहिए लेकिन इसके ठीक विपरित नालागढ़ में कम आबादी होने के बावजूद भी ज्यादा छूट दी जा रही है।
नालागढ़ के बीडीसी चेयरमैन बलिवंद्र ठाकुर, पाल सिंह ठाकुर और पद्म सिंह ने बताया कि एक शहर में टीसीपी के अलग-अलग कानून होने से बद्दी के लोगों को इसका नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जिन लोगों के पास जमीन कम है उन्हें अधिक छूट देनी चाहिए। वहीं इस संबंध में नगर योजनाकार संदीप शर्मा ने बताया कि बद्दी और बरोटीवाला के लिए वर्ष 1993 में मास्टर प्लान बना था। यहां पर अंतरिम विकास योजना बनी थी। इसमें लोगों की आपत्ति दर्ज नहीं हुई थी। नालागढ़ में वर्ष 2000 में मास्टर प्लान तैयार किया। यहां पर लोगों से सुझाव मांगे गए थे जिससे प्लानिंग में छूट दी गई। शीघ्र ही बीबीएन के नया प्लान आने वाला है जिसमें पूरे बीबीएन के लिए एक ही कानून लागू होगा।
